⚠️छत पर टंकी देखने गई बच्ची को विषधर ने डसा, अस्पताल पहुंचती तो बच सकती थी जिंदगी
⚠️बेगूसराय में बाढ़ और जलजमाव के बीच बढ़ा सर्पदंश का खतरा
समाचार विचार | छौड़ाही
बेगूसराय जिले के कई प्रखंड इन दिनों बाढ़ और जलजमाव की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। खेत पानी में डूबे हैं, गांवों की गलियां जलमग्न हैं और घरों के आसपास पानी भरा हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में जहरीले सांपों का इंसानी बस्तियों में निकलना आम बात हो जाती है। लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि सर्पदंश के बाद आज भी कई ग्रामीण परिवार अस्पताल पहुंचने के बजाय झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में कीमती समय गंवा देते हैं। छौड़ाही प्रखंड के शाहपुर पंचायत अंतर्गत भोजा गांव में रविवार को घटी एक दर्दनाक घटना इसी कड़वी सच्चाई को सामने लाती है। महज 9 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी, जो अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी और पूरे परिवार की लाडली थी, जहरीले सांप के डसने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गई। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बाढ़ के मौसम में सर्पदंश को हल्के में लेना या अंधविश्वास के चक्कर में झाड़-फूंक पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।
टंकी में पानी देखने गई थी लक्ष्मी, लेकिन छत पर पहले से बैठी थी मौत
रविवार दोपहर करीब एक बजे घर में मोटर चलने की आवाज सुनकर लक्ष्मी छत पर गई थी। उसका मकसद सिर्फ इतना था कि वह देख सके कि पानी की टंकी भर रही है या नहीं। उसे क्या पता था कि जिस छत पर वह रोज की तरह पहुंची है, वहां पहले से मौत फन फैलाए बैठी है। जैसे ही उसने कदम रखा, छिपे हुए जहरीले सांप ने उसे डस लिया। कुछ ही पल में मासूम दर्द से तड़प उठी और घर में अफरा-तफरी मच गई।
एक फैसला जो जान बचा सकता था, लेकिन वही सबसे बड़ी भूल बन गया
सर्पदंश के बाद सबसे जरूरी होता है कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए, क्योंकि जहरीले सांप का जहर मिनटों और घंटों में पूरे शरीर में फैल सकता है। लेकिन लक्ष्मी के साथ ऐसा नहीं हुआ। परिजन पहले अंधविश्वास के फेर में रहकर झाड़-फूंक कराने में उलझ गए। गांव में पारंपरिक तरीके से इलाज कराने की कोशिश होती रही और लगभग डेढ़ घंटे तक कीमती समय निकल गया। जब तक परिवार को अस्पताल ले जाने की जरूरत का एहसास हुआ और उसे रोसड़ा अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। एक ऐसा फैसला, जो शायद उसकी जिंदगी बचा सकता था, वही उसके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया।

घर की सबसे छोटी बेटी थी लक्ष्मी, पूरे गांव में पसरा मातम
लक्ष्मी, स्वर्गीय संतोष दास की बेटी थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी और परिवार की आंखों का तारा मानी जाती थी। उसकी मौत के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। मां रेखा देवी बेसुध हो गईं, जबकि दादी गोदावरी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की सूचना मिलते ही गांव के लोग बड़ी संख्या में घर पहुंच गए। मुखिया रोहित कुमार, सरपंच मो. मिस्बाहउद्दीन, फिरोज आलम समेत कई जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने परिवार को सांत्वना दी।।गांव में हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—अगर समय पर अस्पताल पहुंच जाते तो क्या लक्ष्मी बच सकती थी?
बाढ़ के मौसम में आखिर क्यों बढ़ जाता है सर्पदंश?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ और जलजमाव के दौरान सांप अपने प्राकृतिक बिलों से बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं। जब खेत, मेड़ और बिल पानी में डूब जाते हैं तो वे सुरक्षित जगह की तलाश में घरों, छतों, लकड़ी के ढेर, भूसे, पशुशालाओं और पानी की टंकियों के आसपास छिप जाते हैं। इसी वजह से इस मौसम में लोग अनजाने में उनके संपर्क में आ जाते हैं और सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं।।बेगूसराय के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में इन दिनों यही स्थिति बनी हुई है। इसलिए लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
सबसे बड़ी समस्या: इलाज से पहले अंधविश्वास
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार यह मानते हैं कि झाड़-फूंक से सांप का जहर उतर जाएगा। इसी विश्वास के कारण लोग अस्पताल जाने में देर कर देते हैं। जबकि चिकित्सा विज्ञान साफ कहता है कि जहरीले सांप के काटने का प्रभावी इलाज अस्पताल में उपलब्ध एंटी-स्नेक वेनम (ASV) है। समय पर इलाज मिलने से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। देर होने पर जहर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल सकता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है। लक्ष्मी की घटना इसी बात की दुखद याद दिलाती है।
सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो सबसे पहले घबराने की बजाय सही कदम उठाना जरूरी है।
📍 मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं।
📍काटे गए अंग को ज्यादा हिलने-डुलने न दें।
📍 मरीज को शांत रखें ताकि जहर तेजी से न फैले।
📍यदि सुरक्षित हो तो सांप की पहचान करने की कोशिश करें, लेकिन उसे पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।
इलाज में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है।
क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
सर्पदंश के बाद कई लोग ऐसे घरेलू उपाय अपनाते हैं जो नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
🚨 झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।
🚨 जख्म को काटने या चूसने की कोशिश न करें।
🚨 सांप काटे स्थान को जलाएं नहीं।
🚨रस्सी या कपड़े से अंग को कसकर न बांधें।
🚨मरीज को दौड़ने या भागने न दें।
बाढ़ के मौसम में बच्चों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
⚠️ बच्चों को अकेले छत, खेत या पानी भरे इलाकों में न जाने दें।
⚠️शाम और रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें।
⚠️घर के आसपास लकड़ी, भूसा और कचरे के ढेर साफ रखें।
⚠️पानी की टंकियों और छतों की नियमित जांच करें।
⚠️ बंद जूते पहनने की आदत डालें।
यह खबर सिर्फ लक्ष्मी की नहीं, पूरे समाज के लिए संदेश है
लक्ष्मी अब लौटकर नहीं आएगी। लेकिन उसकी कहानी शायद किसी और परिवार को वही गलती दोहराने से रोक सकती है। बाढ़ और जलजमाव के इस दौर में बेगूसराय के हजारों परिवार जोखिम में हैं। ऐसे समय में सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। यदि किसी को सांप काटे तो पहले अस्पताल जाएं, बाद में बाकी बातें सोचें। झाड़-फूंक, टोना-टोटका और अंधविश्वास इलाज का विकल्प नहीं हैं। एक सही फैसला, सही समय पर उठाया गया कदम और अस्पताल तक तुरंत पहुंचना किसी की जिंदगी बचा सकता है। लक्ष्मी की मौत यही सवाल छोड़ गई है कि क्या हम अब भी अंधविश्वास के भरोसे अपने बच्चों की जान जोखिम में डालते रहेंगे, या इस हादसे से सबक लेकर पूरे समाज को जागरूक बनाएंगे?
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