मो. हसमत ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के सामने सेवा, संवेदना और परोपकार की प्रेरक मिसाल पेश की है। उन्होंने मृत्यु के बाद अपना हृदय, लिवर और किडनी दान करने की सहमति दी है।
📍मृत्यु के बाद भी बचाएंगे जिंदगियां, हार्ट-लिवर और किडनी दान का लिया संकल्प
📍भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत जारी हुआ अंगदान प्रतिज्ञा प्रमाणपत्र
📍मानवता और सामाजिक सरोकार की मिसाल बने मो. हसमत
समाचार विचार | बेगूसराय
जीवन का वास्तविक अर्थ केवल अपने लिए जीना नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगाना भी है। इसी मानवीय भावना को आत्मसात करते हुए विभूतिपुर के मो. हसमत ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के सामने सेवा, संवेदना और परोपकार की प्रेरक मिसाल पेश की है। उन्होंने मृत्यु के बाद अपना हृदय, लिवर और किडनी दान करने की सहमति दी है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद कायम रह सके।भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत अंगदान के लिए जारी प्रतिज्ञा प्रमाणपत्र के अनुसार, मो. हसमत ने अपने महत्वपूर्ण अंगों के दान की इच्छा व्यक्त की है। यह प्रमाणपत्र 16 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है। उनका यह फैसला केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संदेश है।
मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प
आमतौर पर लोग अपने जीवनकाल में सामाजिक कार्यों, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण के माध्यम से दूसरों के लिए योगदान देते हैं। लेकिन अंगदान ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी किसी दूसरे इंसान के जीवन को बचाने में योगदान दे सकता है। मो. हसमत का संकल्प इसी विचार को मजबूत करता है। उन्होंने हृदय, लिवर और किडनी दान करने की इच्छा जताकर यह संदेश दिया है कि मानव जीवन का मूल्य दूसरों की जिंदगी में उम्मीद जगाने से भी बढ़ता है।गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण जीवन बचाने का महत्वपूर्ण विकल्प होता है। ऐसे में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ना जरूरी है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर प्रत्यारोपण का अवसर मिल सके।

एक संकल्प, कई जिंदगियों के लिए उम्मीद
चिकित्सा विज्ञान में अंग प्रत्यारोपण ने अनेक मरीजों के जीवन को नई दिशा दी है। हृदय, लिवर और किडनी जैसे अंगों की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए उपयुक्त दाता से मिलने वाला अंग जीवन की उम्मीद बन सकता है।मो. हसमत ने जिन अंगों को दान करने की सहमति दी है, वे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मृत्यु के बाद अंगों का प्रत्यारोपण संबंधित चिकित्सकीय जांच, अंगों की उपयुक्तता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। उनका यह कदम समाज को सोचने का अवसर देता है कि यदि अधिक लोग अंगदान के महत्व को समझें और अपनी इच्छा परिवार के साथ साझा करें, तो जरूरतमंद मरीजों के लिए सहायता के अवसर बढ़ सकते हैं।
अंगदान को लेकर क्या कहता है भारत सरकार का तंत्र?
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) देश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी व्यवस्थाओं के समन्वय, जागरूकता तथा दाता और प्राप्तकर्ता के पंजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संगठन का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों तक अंग प्रत्यारोपण की सुविधा पहुंचाने और अंगदान के प्रति सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में मदद करना है। NOTTO के आधिकारिक पोर्टल पर नागरिक अंगदान की प्रतिज्ञा दर्ज करा सकते हैं और प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। संगठन अंगदान के संबंध में जानकारी देने के लिए 24 घंटे उपलब्ध टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-4770 भी संचालित करता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अंगदान की प्रतिज्ञा किसी व्यक्ति की इच्छा को दर्ज करने का माध्यम है। प्रतिज्ञा दर्ज करा लेने भर से मृत्यु के बाद अंगदान स्वतः सुनिश्चित नहीं हो जाता। उस समय चिकित्सकीय उपयुक्तता, लागू नियमों और परिवार अथवा निकट संबंधियों की सहमति से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अंगदान का संकल्प लेने के साथ अपने परिवार को भी इसकी जानकारी देना जरूरी है।

जागरूकता से मजबूत होगा अंगदान अभियान
अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ जरूरी है कि लोग अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें, प्रमाणिक जानकारी हासिल करें और अपने परिवार तथा परिचितों के बीच इस विषय पर खुलकर चर्चा करें।अक्सर जानकारी के अभाव में लोग अंगदान की प्रक्रिया और उसके महत्व को ठीक से नहीं समझ पाते। ऐसे में मो. हसमत जैसे लोगों की पहल समाज में सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा दे सकती है। उनका संकल्प दूसरे लोगों को भी इस दिशा में विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
समाज के लिए प्रेरणा बना मो. हसमत का फैसला
मो. हसमत की यह पहल मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती है। अंगदान का संकल्प लेकर उन्होंने यह रेखांकित किया है कि किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने की इच्छा इंसान को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना सकती है। आज जब अनेक मरीज अंग प्रत्यारोपण की उम्मीद में उपचार करा रहे हैं, तब अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। मो. हसमत का कदम इसी दिशा में एक सराहनीय पहल है। उनका संकल्प यह संदेश देता है कि जीवन की सार्थकता केवल अपनी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने की भावना भी इंसान को विशिष्ट बनाती है। यदि इस तरह की पहल से समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ती है, तो यह मानवता की सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
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