तेघड़ा न्यूज: गौरा भगवती स्थान में मनी परंपरागत बुढ़वा मंगल होली

📍तेघड़ा में 17 वीं सदी से चली आ रही है यह अनोखी परंपरा
तेघड़ा
समाचार विचार/तेघड़ा: भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना अलग रंग देखने को मिलता है लेकिन तेघड़ा के गौरा की बुढ़वा मंगल होली अपनी खास परंपराओं और संस्कृति के लिए जानी जाती है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली के उपरांत प्रथम मंगलवार को तेघड़ा के गौड़ा भगवती स्थान में पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ बुढ़वा होली (बुढ़वा मंगल होली) मनाई गई। इस अवसर पर भक्तों ने माता की पूजा अर्चना के बाद अबीर-गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत की और पारंपरिक फगुआ गीतों ,ढोल हारमोनियम, मांदर की धुन पर होली गीत गाकर उत्सव में चार चांद लगा दिया। बुजुर्गों का सम्मान और समाज में आपसी भाई चारो के रूप में सदियों से चली आ रही इस परंपरा में पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। होली के अगले प्रथम मंगलवार को बुढ़वा होली मनाने की यह परंपरा की शुरुआत स्वर्गीय ब्रह्मदत्त पाठक के नेतृत्व में किया गया था जो परंपरा 1705 ई. से चली आ रही है। बुजुर्गों के होली मिलन के साथ मंदिर परिसर से के पारंपरिक गीत गाते हुए शोभा यात्रा निकाली गई जो गांव के हर मोहल्ले का भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचा। स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक होली गीत गाकर लोगों को आनंदित किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में माता को खीर का भोग लगाने के बाद हजारों की संख्या में कुमारी कन्याओं को भोजन कराया गया।ठाकुरबाड़ी के महंत बाबा ब्रह्मचारी दास जी महाराज बताते हैं कि बुढ़वा मंगल का उद्देश्य होली की मस्ती के बाद समाज को एक मंच पर लाना और रिश्तो को मजबूत करना माना जाता है। कार्यक्रम में सुधाकर पाठक, अशोक पाठक, संजीव कुमार, अरुण राय, रोशन पाठक, मोहन ठाकुर, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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