बिहार शिक्षक सेवामुक्ति का मामला अब राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी गरमाने लगा है। 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश के बीच केंद्रीय मंत्री सह बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।
📍35 हजार शिक्षकों के लिए रिव्यू पिटीशन की मांग
📍सांसद की पहल से शिक्षकों में जगी उम्मीद
समाचार विचार | बेगूसराय: बिहार में 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति के शिक्षा विभाग के आदेश के बाद मामला अब राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी गरमाने लगा है। करीब 35 हजार शिक्षकों की सेवा और भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में केंद्रीय मंत्री सह बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग की है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सेवा समाप्ति संबंधी आदेश पर रोक लगाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया गया है। बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट, बेगूसराय की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के बाद सांसद गिरिराज सिंह ने यह पहल की है। संघ ने सांसद के हस्तक्षेप के लिए आभार जताते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार इस मामले में प्रभावित शिक्षकों के हित में ठोस कदम उठाएगी।
बिहार शिक्षक सेवामुक्ति से 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर संकट
मामले की जड़ में प्राथमिक शिक्षा निदेशक, शिक्षा विभाग बिहार का पत्रांक-2853, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 है। इस आदेश के माध्यम से 31 मार्च 2015 के बाद आवश्यक प्रशिक्षण योग्यता के बिना नियुक्त किए गए अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों के संबंध में सेवा समाप्ति की कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार इस आदेश के बाद बिहार के अलग-अलग जिलों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति, प्रशिक्षण योग्यता और वर्तमान सेवा स्थिति की जांच कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी है। शिक्षा विभाग की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश से जुड़े मामले के आलोक में सामने आई है। बिहार शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 1 अक्टूबर 2026 को अब्दुल बाकी अंसारी एवं अन्य बनाम भारत संघ सहित संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में कार्रवाई का उल्लेख दर्ज है।
35 हजार शिक्षकों की नौकरी और आजीविका पर चिंता
शिक्षक संगठन का कहना है कि इस फैसले से बेगूसराय सहित पूरे बिहार में लंबे समय से विद्यालयों में सेवा दे रहे लगभग 35 हजार शिक्षकों के सामने नौकरी और आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है। संगठन का तर्क है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक सरकारी विद्यालयों में अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे में अचानक सेवा समाप्ति का आदेश उनके परिवारों पर भी सीधा असर डाल सकता है।बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के कार्यकारी जिला अध्यक्ष नीतेश रंजन की ओर से सांसद को दिए गए ज्ञापन के आधार पर गिरिराज सिंह ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा है। पत्रांक-834493 दिनांक 6 अक्टूबर 2026 में उन्होंने प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कराने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद में 31 मार्च 2015 की तारीख महत्वपूर्ण है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार बिहार में अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर प्रशिक्षण योग्यता और नियुक्ति की वैधता का प्रश्न लंबे समय से न्यायिक विचार का विषय रहा है। पटना हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों में भी 31 मार्च 2015 के बाद अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को अब्दुल बाकी अंसारी एवं अन्य तथा संबंधित मामलों में अपीलों का निपटारा किया। आदेश में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की न्यूनतम प्रशिक्षण योग्यता के संबंध में पटना हाईकोर्ट के फैसलों से जुड़े विवाद पर सुनवाई का उल्लेख है।वहीं, 31 मार्च 2015 को सेवा में रहे कुछ अप्रशिक्षित शिक्षकों को डीएलएड की योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का अवसर दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यानी मामले में नियुक्ति की तारीख और उस समय की प्रशिक्षण योग्यता दोनों महत्वपूर्ण आधार हैं।
बिहार शिक्षक सेवामुक्ति मामले में गिरिराज सिंह की पहल से शिक्षकों में जगी उम्मीद
गिरिराज सिंह की ओर से शिक्षा मंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद शिक्षक संगठन ने इसे प्रभावित शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण पहल बताया है। जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार मिश्र और कार्यकारी अध्यक्ष नीतेश रंजन ने सांसद के प्रति आभार जताते हुए कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक और कानूनी मंच पर आवाज उठाई जाएगी। शिक्षक संघ की मांग है कि जब तक पुनर्विचार याचिका पर न्यायालय में सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक सेवा समाप्ति की कार्रवाई पर रोक लगाने की दिशा में सरकार पहल करे। संघ का मानना है कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के भविष्य से जुड़े इस मामले में मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।अब निगाहें बिहार शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो बिहार शिक्षक सेवामुक्ति का यह मामला एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पहुंच सकता है।
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