हालांकि, बेगूसराय में वेतन घोटाला होने की पुष्टि नहीं हुई है फिर भी संघ ने आशंका जताई है कि यदि संविदा समाप्त होने के बावजूद ऑपरेटरों से काम लिया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
📍संविदा खत्म, फिर भी शिक्षा विभाग के दफ्तर में डटे डाटा एंट्री ऑपरेटर
⚠️शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
📍सेवा मुक्त कर्मियों के कार्यालय प्रवेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग
⚠️संविदा समाप्त होने के बावजूद प्रखंड से जिला शिक्षा कार्यालय तक काम करने का आरोप
📍कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन करेगा संघ
समाचार विचार/बेगूसराय: बिहार शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना के आदेश के आलोक में आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा संविदा समाप्त किए जाने के बावजूद डाटा एंट्री ऑपरेटरों के प्रखंड से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय तक लगातार पहुंचने और काम करने का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण ने विभागीय निगरानी, प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक संघ ने इस स्थिति को संभावित वित्तीय अनियमितता से जोड़ते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (गोप गुट), बेगूसराय के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार मिश्र ने आरोप लगाया है कि सितंबर माह में सेवा मुक्त किए जाने के बावजूद संबंधित डाटा एंट्री ऑपरेटरों का कार्यालयों में लगातार आना-जाना जारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियोक्ता कंपनी संविदा समाप्त कर चुकी है, तो आखिर किसके आदेश पर इन कर्मियों को कार्यालयों में आने और काम करने दिया जा रहा है? यदि संविदा समाप्त हो चुकी है, तो उनके कार्य निष्पादन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
संविदा समाप्त, फिर किस अधिकार से हो रहा काम?
संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि संविदा समाप्त होने के बाद भी पूर्व की तरह कार्यालयों में काम करना किसी भी स्थिति में सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। यदि संबंधित कर्मियों को विभागीय स्तर पर किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत काम सौंपा गया है, तो उसके आदेश और वैधानिक आधार को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अन्यथा यह मामला विभागीय लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितता की गंभीर आशंका पैदा करता है।उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि सेवा मुक्त कर्मियों की कार्यालयों में उपस्थिति के पीछे किसका निर्देश है तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है।
फर्जी शिक्षक आईडी और अवैध वेतन निकासी के मामलों ने बढ़ाई चिंता
राज्य के विभिन्न जिलों में फर्जी शिक्षक आईडी तैयार कर कथित रूप से अवैध वेतन निकासी के मामलों को लेकर शिक्षा विभाग में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की बात सामने आई है। विज्ञप्ति के अनुसार, कुछ जिलों में इस तरह के मामलों में डाटा एंट्री ऑपरेटरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई भी की जा रही है। ऐसे मामलों की पृष्ठभूमि में बेगूसराय में सेवा मुक्त ऑपरेटरों की कथित निरंतर उपस्थिति ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ का कहना है कि जब राज्य स्तर पर इस तरह की अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है, तब जिले में भी इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।हालांकि, बेगूसराय में वेतन घोटाला होने की पुष्टि नहीं हुई है। संघ ने आशंका जताई है कि यदि संविदा समाप्त होने के बावजूद ऑपरेटरों से काम लिया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।

शिक्षकों के शोषण का भी लगाया आरोप
मुकेश कुमार मिश्र ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मियों द्वारा पूर्व में भी लंबे समय तक प्रखंड से लेकर जिला कार्यालय तक शिक्षकों का दोहन और शोषण किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मियों की नियुक्ति, कार्यावधि और अधिकारों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। संविदा समाप्त होने के बाद भी यदि कोई कर्मी विभागीय कार्यालयों में कार्य करता है, तो उसकी जवाबदेही और वैधानिक स्थिति स्पष्ट करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की मांग
शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांग की है कि सेवा मुक्त डाटा एंट्री ऑपरेटरों के प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के कार्यालयों में प्रवेश और कार्य निष्पादन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, संविदा समाप्ति के बाद उनकी उपस्थिति, कार्यों और संबंधित आदेशों की जांच कराई जाए। संघ का कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि शिक्षा विभाग के कामकाज और शिक्षकों के वेतन से संबंधित अभिलेखों की सुरक्षा पर कोई सवाल न उठे।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
मुकेश कुमार मिश्र ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संविदा समाप्त होने के बावजूद संबंधित कर्मियों का कार्यालयों में आना और काम करना जारी रहा तथा विभाग ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (गोप गुट) आंदोलन की घोषणा करेगा। अब सवाल यह है कि संविदा समाप्त होने के बाद भी डाटा एंट्री ऑपरेटरों की कथित उपस्थिति पर शिक्षा विभाग क्या कदम उठाता है? क्या जिला शिक्षा प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा, या फिर यह गंभीर सवाल विभागीय फाइलों में ही दबकर रह जाएगा? जिले के शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
Begusarai Locals
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