शराबबंदी के बीच नया खेल: मरीज नहीं, व्हिस्की ढो रही थी एम्बुलेंस

📍बेगूसराय पुलिस ने जब्त की 373.680 लीटर विदेशी शराब 
📍सवाल फिर वही—रास्ते बदल रहे हैं, कारोबार नहीं

शराबबंदी

समाचार विचार | बेगूसराय:
बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन शराब तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर पुलिस को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। बेगूसराय के वीरपुर थाना क्षेत्र में शनिवार रात ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली एम्बुलेंस कथित तौर पर शराब तस्करी का जरिया बन गई। पुलिस ने रात्रि गश्ती के दौरान एक एम्बुलेंस से 37 कार्टन विदेशी शराब बरामद की, जबकि तीनों तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शराबबंदी के बावजूद तस्कर किस तरह रोज नए हथकंडे अपनाकर अवैध कारोबार को जारी रखे हुए हैं।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल
वीरपुर थानाध्यक्ष राजू रंजन कुमार ने बताया कि शनिवार रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि वीरपुर से टांरी गांव की ओर जाने वाली ग्रामीण सड़क से एक सफेद रंग की मारुति सुजुकी ईको कंपनी की एम्बुलेंस (BR09BC2224) में भारी मात्रा में विदेशी शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई और संभावित रास्ते पर चारों ओर से घेराबंदी कर दी। पुलिस की मौजूदगी का आभास होते ही एम्बुलेंस में सवार तीन लोग वाहन छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए।
एम्बुलेंस खोलते ही निकली शराब की खेप
जब पुलिस ने एम्बुलेंस की तलाशी ली तो भीतर का नजारा चौंकाने वाला था। वाहन के अंदर मरीज या चिकित्सकीय उपकरणों की जगह विदेशी शराब के कार्टन भरे हुए थे। पुलिस ने वाहन से कुल 37 कार्टन विदेशी शराब बरामद की। इसमें उत्तराखंड और चंडीगढ़ निर्मित शराब शामिल है।
कितनी शराब बरामद हुई?
पुलिस के अनुसार एम्बुलेंस से बरामद शराब का विवरण इस प्रकार है—
37 कार्टन विदेशी शराब
1776 बोतल विदेशी शराब
300 खुली बोतल (180 एमएल) ऑल सीजन गोल्ड व्हिस्की
कुल 373.680 लीटर विदेशी शराब
बरामदगी के बाद पुलिस ने एम्बुलेंस को जब्त कर लिया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
तीन तस्करों की हुई पहचान
पुलिस ने फरार आरोपियों की पहचान कर ली है। थानाध्यक्ष के अनुसार मामले में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें—
जीवन गौतम उर्फ फूलना (पुत्र संजय सिंह, वीरपुर)
संजीवन कुमार उर्फ सोनू (जीवन गौतम का भाई)
 विनोद कुमार (पुत्र असर्फी महतो, निवासी बड़हारा)
शामिल हैं। तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

शराबबंदी

पहले से दर्ज हैं कई मामले
थानाध्यक्ष ने बताया कि मुख्य आरोपी जीवन गौतम के खिलाफ वीरपुर थाना में पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस उसके आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद शराब की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।
गोपालगंज कनेक्शन भी आया सामने
पुलिस ने जांच के दौरान एक पुराने मामले का भी जिक्र किया। कुछ महीने पहले गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में भी एक एम्बुलेंस से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद हुई थी।उस कार्रवाई में वीरपुर निवासी बिक्कू कुमार को मौके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि जीवन गौतम कथित तौर पर वहां से फरार हो गया था। पुराने और नए मामले के बीच समानता को देखते हुए पुलिस संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
छापेमारी दल में कौन-कौन रहे शामिल?
पूरे अभियान का नेतृत्व वीरपुर थानाध्यक्ष राजू रंजन कुमार ने किया। उनके साथ रात्रि गश्ती अधिकारी प्रभुनाथ शुक्ला समेत पुलिस बल के अन्य जवान भी मौजूद रहे। पुलिस का कहना है कि गुप्त सूचना के आधार पर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो शराब की यह बड़ी खेप अपने गंतव्य तक पहुंच सकती थी।
सवाल फिर वही—रास्ते बदल रहे हैं, कारोबार नहीं
वीरपुर क्षेत्र में सामने आई यह घटना स्थानीय स्तर पर कई सवाल छोड़ गई है। शराबबंदी वाले राज्य बिहार में पुलिस कार्रवाई के बाद कुछ समय तक तस्करी धीमी पड़ती दिखाई देती है, लेकिन बाद में तस्कर नए तरीके अपनाकर फिर सक्रिय हो जाते हैं। इस बार एम्बुलेंस जैसे वाहन का इस्तेमाल सामने आने से यह स्पष्ट होता है कि तस्कर जांच से बचने के लिए ऐसे वाहनों का भी सहारा ले रहे हैं, जिन पर आमतौर पर कम संदेह किया जाता है।फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हुई है।

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