नगर सभापति अर्चना कुमारी की पहल: दो ऐतिहासिक कुओं का हुआ पुनर्जन्म

नगर सभापति
➡️नगर सभापति ने पेश की जल-संचय और विरासत संरक्षण की मिसाल
➡️उद्घाटन के अवसर पर लोगों ने की कार्यशैली की जमकर सराहना

समाचार विचार/खगड़िया: नगर परिषद खगड़िया में विकास को नई दिशा देते हुए नगर सभापति अर्चना कुमारी के नेतृत्व में वार्ड संख्या–07, तांती टोला मथुरापुर में दो पुराने पारंपरिक कुओं का जीर्णोद्धार कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। दोनों कुएँ वर्षों से उपेक्षित और जर्जर स्थिति में थे, जिन्हें अब सुरक्षित, मजबूत और उपयोगी स्वरूप में पुनर्जीवित किया गया है। दोनों कुओं पर समान रूप से ₹2,55,400 की राशि खर्च की गई है, जिससे क्षेत्र में जल-संचय और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण को नया आधार मिला है। नगर सभापति अर्चना कुमारी ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि नगर विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित न रहे, बल्कि पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। इसी सोच के तहत दोनों ऐतिहासिक कुओं का जीर्णोद्धार कराया गया, जिन्हें स्थानीय लोग पुरखों की अमूल्य विरासत मानते हैं।
उद्घाटन के अवसर पर लोगों ने की कार्यशैली की जमकर सराहना
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि इन कुओं का पुनरुद्धार सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-सुरक्षा और पर्यावरणीय चेतना का संदेश है। नगर सभापति अर्चना कुमारी के नेतृत्व में नगर परिषद खगड़िया में पहली बार विकास और विरासत को एक साथ जोड़ने का कार्य धरातल पर दिख रहा है। उद्घाटन के अवसर पर लोगों ने नगर सभापति अर्चना कुमारी की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में नगर परिषद खगड़िया जिम्मेदार, दूरदर्शी और जनहितकारी प्रशासन की पहचान बना रहा है। जल संकट के दौर में पारंपरिक कुओं का संरक्षण नगर के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक कदम है।

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संरक्षण केवल जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि हमारा कर्तव्य भी है
इस अवसर पर रंजीत कुमार (वार्ड पार्षद), पप्पू यादव (वार्ड पार्षद), राजकरण कुमार, विकास कुमार, गोलू कुमार, राजकिशोर महतो, नितेश कुमार, सिंटू कुमार, रवि कुमार, रोहित कुमार सहित दर्जनों स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि नगर सभापति अर्चना कुमारी का नेतृत्व नगर परिषद खगड़िया को विकास के साथ-साथ संवेदनशीलता और संस्कार की राह पर ले जा रहा है। नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए जल स्रोत आज भी हमें जीवन का रास्ता दिखाते हैं। इनका संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति हमारा कर्तव्य है। दो ऐतिहासिक कुओं का यह जीर्णोद्धार कार्य नगर परिषद खगड़िया में विकास + विरासत + जल-संचय के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी पूरे शहर में सराहना हो रही है।

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