बेगूसराय में फिर कलंकित हुए धरती के भगवान: लापरवाह डॉक्टर ने ले ली महिला की जान

📍 बेगूसराय में मृतका के परिजनों ने न्यू अमृत जीवन हॉस्पिटल प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप
📍स्थानीय लोग आईएमए की चुप्पी पर भी उठा रहे हैं सवाल
समाचार विचार/बेगूसराय: उत्तर बिहार के मेडिकल हब के रूप में चर्चित बेगूसराय में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए कॉरपोरेट शक्ल के निजी हॉस्पिटल में अगर आप सफल इलाज का सपना लेकर दाखिल होते हैं, तो यह खबर पढ़ लीजिए। ऐन केन प्रकारेण केवल धनार्जन की उत्कट अभिलाषा से सेवा भाव को बलि देने वाले बेगूसराय के कुछ दानवी प्रवृति के चिकित्सकों की काली करतूतों की वजह से न केवल सेवा भाव से जुटे चिकित्सकों बल्कि बेगूसराय जिले का पूरा चिकित्सा जगत शर्मसार हो गया है। आए दिन चिकित्सकों की लापरवाही से असमय काल के गाल में समाने वाले मरीजों की खबर खूब सुर्खियां बटोरती है। इसी क्रम में आज एक बार फिर बेगूसराय के एक निजी हॉस्पिटल की करतूत चर्चा में है।

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डॉक्टर की लापरवाही से 20 वर्षीय महिला की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर के चैंबर में घुसकर दी गोली मारने की धमकी
दरअसल बेगूसराय के टाउन थाना अंतर्गत मुंगेरीगंज़ स्थित न्यू अमृत जीवन हॉस्पिटल, जो खराब इलाज, अकुशल, अप्रशिक्षित और असंवेदनशील चिकित्सकों के द्वारा इलाज किए जाने को लेकर जिले के विभिन्न इलाके में बदनाम है, उसी में रविवार की शाम ऑपरेशन के दौरान धबौली वार्ड 7 निवासी श्याम सुंदर भगत की पुत्रवधू ममता देवी की मौत हो गई। मौत के उपरांत परिजनों के आक्रोश और गुस्सा को समाचार विचार के पास मौजूद वीडियो में देखा जा सकता है, जिसमें 20 वर्षीय ममता की डॉक्टर की लापरवाही से हुई असामयिक मौत के बाद परिजन डॉक्टर की चैंबर में घुसकर यह कहते देखे जा रहे हैं कि तुमको गोली मार देंगे, लेकिन डॉक्टर जांच कमिटी की बात कहता नजर आ रहा है। हालांकि, परिजनों ने हॉस्पिटल में किसी प्रकार की हिंसक प्रवृति का परिचय न देते हुए ऐसी विषम परिस्थिति में भी संयम का परिचय दिया, जो अक्सर ऐसे वक्त में नहीं देखा जाता है। समाचार विचार के कैमरे में इस अस्पताल परिसर में मौजूद मृतक के परिवार के सभी सदस्यों का बयान कैद है, जिसे देख और सुनकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे और आप यह जानकर स्तब्ध रह जाएंगे कि बेगूसराय के कुछ चिकित्सकों के लिए मरीज केवल रुपए उगलने की मशीन है।

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परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया इलाज में घोर लापरवाही का आरोप
परिजनों ने समाचार विचार को बताया कि ममता देवी कई महीनों से पित्त की थैली में स्टोन से पीड़ित चल रही थी, जिसका विधिवत इलाज न्यू अमृत जीवन हॉस्पिटल में ही सर्जन डॉ. अमित कुमार की देख रेख में चल रहा था। जिसे लेकर ममता के परिवार वाले ममता को दिनांक 8/4/26 शुक्रवार को अस्पताल में ऑपरेशन के लिए एडमिट करवाते हैं। इस दौरान हुए कुछ पैथोलॉजिकल जांच के उपरांत चिकित्सक के द्वारा सलाह दी जाती है कि ब्लैडर में सूजन है। तत्काल दवा के प्रभाव से इसे कम कर ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सूजन कम होने के बाद कल दिनांक 10/4/26 को शाम 6 बजे ममता को ऑपरेशन के लिए थिएटर में शिफ्ट कर ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसी दौरान ऑपरेशन के क्रम में ममता की स्थिति बिगड़ते देख चिकित्सक ने आनन फानन में उसे एम्बुलेंस में डालकर परिजनों को पटना जाने की सलाह देते हैं।
ऑपरेशन थियेटर में ही चली गई थी ममता की जान
परिजनों का कहना है कि ममता की मौत ऑपरेशन थिएटर में ही हो गई थी। उसकी मौत अत्यधिक ब्लीडिंग से हुई, हमलोगों ने तीन यूनिट बल्ड लाकर भी दिया है और अचानक डॉक्टर ने उसे पटना रेफर कहने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। जबकि गलत तरीके से की गई ऑपरेशन की वजह से ही ममता की जान चली गई। महज 20 वर्ष की उम्र में दुनिया छोड़ गई ममता अपने पीछे पति सहित तीन मासूम बच्चों को छोड़ गई है। तीन बच्चों को छोड़कर मां का यूं असमय चले जाना परिवार के लिए असहनीय आघात है, लेकिन मरीज को रुपया की मशीन समझने वाले ऐसे दानवी प्रवृति के चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन को इससे क्या लेना देना है।

पहले से ही जिले में बदनाम रहा है न्यू अमृत जीवन हॉस्पिटल
स्थानीय लोगों ने चीख चीख कर बताया कि मुंगेरीगंज स्थित यह अस्पताल अपनी लापरवाही के लिए जिले में पहले से ही बदनाम रहा है। आए दिन इस अस्पताल में डॉक्टर्स की लापरवाही से मरीजों की जान जाती रहती है। कुछ मामलों में परिजन कानूनी पचड़े में नहीं फंसना चाहते हैं और अस्पताल प्रबंधन दो चार लाख देकर मामले को मैनेज कर लेता है। इस मामले में भी यही सूचना प्राप्त हो रही है कि घटना के बाद परिजनों की सूचना पर अस्पताल पहुंचे नगर थानाध्यक्ष ने जांच पड़ताल की, लेकिन सुलह करने की सलाह देकर वे भी चलते बने। इसके बाद परिजनों को मोटी रकम देकर शांत करा दिया गया, क्योंकि गरीब आदमी कानूनी लफड़ा नहीं चाह रहा था।

आईएमए की चुप्पी पर भी उठ रहे हैं सवाल
आए दिन जिले के विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकों की लापरवाही से हो रही मौत पर आईएमए की चुप्पी पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। शहर के बुद्धिजीवियों  में यह चर्चा खुलेआम हो रही है कि लूट खसोट के अड्डे में तब्दील हो चुके बेगूसराय के निजी क्लिनिक्स को आईएमए का संरक्षण प्राप्त है। अगर ऐसा नहीं है तो आईएमए लगातार हो रही ऐसी दर्दनाक मौतों पर अपना स्टैंड क्लियर क्यों नहीं करता है। वह जनहित में ऐसे लापरवाह चिकित्सकों के विरुद्ध किसी भी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं करता है। जानकारी के लिए आपको बता दूं कि आईएमए के एक कद्दावर पदाधिकारी के निजी अस्पताल में भी कुछ माह पूर्व ऐसे ही लापरवाही की घटना सामने आई थी, जो थाना तक भी पहुंचा था, लेकिन धनबल और प्रभाव के बल पर सार्वजनिक पटल पर नहीं आ पाया था। अगर आप बेगूसराय आईएमए के क्रियाकलापों पर गौर करें तो यह केवल सीएमई और मेडिसिन कंपनी के प्रमोशन पर ही केंद्रित होकर रह गया है। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर बेगूसराय के चिकित्सा जगत को कलंकित और शर्मसार कर दिया है।

 

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