📍हांगकांग में जन्म, लंदन में उच्च शिक्षा; EMG तकनीक से बोलने में असमर्थ लोगों के लिए नई उम्मीद
📍बोलने में असमर्थ लोगों के लिए बन सकती है वरदान

समाचार विचार | बेगूसराय
बेगूसराय जिले के रतनपुर ड्योढ़ी निवासी आयुष कुमार ने तकनीकी क्षेत्र में एक उल्लेखनीय आविष्कार कर परिवार, जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। आयुष ने ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है, जो भविष्य में बोलने में असमर्थ लोगों के लिए संचार का नया माध्यम बन सकती है।
रतनपुर से विदेश तक का प्रेरक सफर
आयुष कुमार रतनपुर ड्योढ़ी निवासी राजेश कुमार सिंह के पुत्र तथा सेंट जोसेफ पब्लिक स्कूल के निदेशक अभिषेक कुमार सिंह के भतीजे हैं। उनका जन्म हांगकांग में हुआ, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता हांगकांग की एक निजी शिपिंग कॉर्पोरेशन में प्रबंध निदेशक हैं, जबकि उनकी माता संतु भारती गृहिणी हैं।

बिना आवाज़ के बोलने के प्रयास को समझती है तकनीक
आयुष ने जिस तकनीक पर काम किया है, वह चेहरे पर लगाए जाने वाले विशेष इलेक्ट्रोड की सहायता से मांसपेशियों से निकलने वाले सूक्ष्म विद्युत संकेतों (EMG Signals) को रिकॉर्ड और पहचानने का प्रयास करती है।जब कोई व्यक्ति बिना आवाज़ निकाले कोई शब्द बोलने का प्रयास करता है, तो चेहरे की मांसपेशियों में बनने वाले सूक्ष्म विद्युत संकेतों को यह प्रणाली पहचानकर उन्हें शब्दों और टेक्स्ट में बदलने की दिशा में कार्य करती है।

बोलने में असमर्थ लोगों के लिए बन सकती है वरदान
इस तकनीक की सबसे बड़ी संभावना यह है कि भविष्य में यह बोलने में असमर्थ लोगों को अपनी भावनाएं, आवश्यकताएं और विचार दूसरों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा डिजिटल उपकरणों के साथ संवाद स्थापित करने में भी इसका उपयोग संभव माना जा रहा है। यदि इस तकनीक को आगे और विकसित कर व्यावहारिक रूप से सफल बनाया जाता है, तो यह संचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
परिवार और शुभचिंतकों ने जताई खुशी
आयुष की इस उपलब्धि पर परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे गर्व का क्षण बताया। उनका कहना है कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद आयुष ने अपनी तकनीकी प्रतिभा का उपयोग मानव जीवन को आसान बनाने की दिशा में किया है, जो अत्यंत सराहनीय है। सेंट जोसेफ पब्लिक स्कूल के निदेशक अभिषेक कुमार सिंह ने इसे परिवार के लिए स्वर्णिम क्षण बताते हुए कहा कि आयुष ने न केवल अपने परिवार और रतनपुर का नाम रोशन किया है, बल्कि बेगूसराय, बिहार और पूरे देश का गौरव भी बढ़ाया है।
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