बेगूसराय में एक साल, दो मासूम की नृशंस हत्या… फिर भी पुलिस के हाथ खाली!

⚠️साहेबपुरकमाल से तेघड़ा तक उठे कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल
⚠️दोनों घटनाओं के बाद परिजनों का आरोप, जांच की रफ्तार बेहद धीमी; जनता पूछ रही है आखिर कब मिलेगा न्याय?
समाचार विचार | बेगूसराय
बिहार के बेगूसराय में मासूम बच्चों की नृशंस हत्या की दो घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और जांच की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साल के अंतराल में दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई इन घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर दिया। पहले अगस्त 2025 में साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र के खरहट गांव में किशोर अनुतांश उर्फ मनसुख की बेरहमी से हत्या हुई। इसके बाद सितंबर 2026 में तेघड़ा थाना क्षेत्र के धनकोल गांव में पांच वर्षीय मोहम्मद सूफियान की हत्या ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। इन दोनों मामलों को लेकर अब एक समान सवाल उठ रहा है—क्या बेगूसराय पुलिस इतने संवेदनशील मामलों में अपराधियों तक पहुंचने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रही है? उल्लेखनीय है कि दोनों घटनाओं के दौरान जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनीष ही थे। हालांकि, इन मामलों में पुलिस की ओर से अलग-अलग स्तर पर जांच जारी रहने की बात कही जाती रही है, लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक न्याय का इंतजार है।

बेगूसराय दो मासूम हत्याकांड

पहला मामला: साहेबपुरकमाल का मनसुख हत्याकांड
अगस्त 2025 में साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र के खरहट गांव का रहने वाला अनुतांश उर्फ मनसुख अचानक लापता हो गया था। परिजनों के अनुसार, बच्चे की तलाश शुरू हुई, लेकिन अगले दिन उसका शव बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई। उस समय स्थानीय लोगों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की मांग तक उठाई थी। आज लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह मामला लोगों की चर्चा में बना हुआ है। गांव के लोगों का कहना है कि इस हत्याकांड का दर्द आज भी उनके मन से नहीं निकला है।
अब तेघड़ा में सूफियान की हत्या से फिर दहल उठा इलाका
साहेबपुरकमाल की घटना की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि सितंबर 2026 में तेघड़ा थाना क्षेत्र के धनकोल गांव में पांच वर्षीय मोहम्मद सूफियान लापता हो गया। परिजनों के अनुसार, 17 सितंबर को बच्चे के गायब होने की सूचना पुलिस को दी गई थी। इसके बाद परिवार लगातार उसकी तलाश करता रहा। पांच दिन बाद, 22 सितंबर को बलान नदी के बांध के पास झाड़ियों से उसका शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे जिले को झकझोर दिया।

बेगूसराय दो मासूम हत्याकांड

मां भूख हड़ताल पर, बोली—“अब सिर्फ न्याय चाहिए”
सूफियान की मां अब इंसाफ की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गई है। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। मां का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस केवल पूछताछ करती रही, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उनका कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहिए।

बेगूसराय दो मासूम हत्याकांड

परिजनों का आरोप—शुरुआत में तेजी दिखाई जाती तो स्थिति अलग होती
सूफियान के परिवार का कहना है कि बच्चे के लापता होने के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दे दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि शुरुआती स्तर पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई जाती, तो जांच की दिशा अलग हो सकती थी। हालांकि, पुलिस की ओर से इस आरोप पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां मामले की जांच जारी होने की बात कहती रही हैं।
दो मामले, कई समान सवाल
इन दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखा जाए, तो कई सवाल सामने आते हैं।
🎯 दोनों मामलों में पीड़ित मासूम बच्चे थे।
🎯 दोनों घटनाओं ने पूरे जिले में व्यापक आक्रोश पैदा किया।
🎯 दोनों मामलों में परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठाए।
🎯 दोनों घटनाओं के दौरान जिले की कमान एसपी मनीष के हाथ में रही।
🎯 दोनों मामलों में लोगों ने जल्द गिरफ्तारी और प्रभावी जांच की मांग की।

बेगूसराय दो मासूम हत्याकांड

यही कारण है कि अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इतने संवेदनशील मामलों में जांच की रफ्तार तेज क्यों नहीं दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष
धनकोल गांव में अब भी लोगों के बीच गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन और चक्का जाम जैसे कदम उठा सकते हैं। उधर साहेबपुरकमाल के लोग भी पुराने मामले को याद करते हुए कहते हैं कि जब पहले मामले में लोगों को संतोषजनक परिणाम नहीं मिला, तो नए मामले ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
इन दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा मुद्दा केवल अपराध नहीं, बल्कि जांच की गति बन गई है।
लोग जानना चाहते हैं—
📍 लापता होने की शिकायत के बाद पुलिस ने क्या-क्या कदम उठाए?
📍 जांच किस चरण में पहुंची है?
📍 गिरफ्तारी में देरी की वजह क्या है?
📍पीड़ित परिवारों को जांच की प्रगति की जानकारी किस स्तर तक दी जा रही है?
ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि दोनों घटनाओं ने लोगों के मन में कानून व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा कर दी है।

बेगूसराय दो मासूम हत्याकांड

जनता को जवाब का इंतजार
बेगूसराय में अब चर्चा सिर्फ दो हत्याओं की नहीं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया की भी है। लोगों का कहना है कि अपराधियों तक पहुंचना पुलिस की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं में हर बीतता दिन पीड़ित परिवारों की पीड़ा बढ़ाता है। सूफियान की मां भूख हड़ताल पर बैठी हैं, जबकि साहेबपुरकमाल का मनसुख हत्याकांड अब भी लोगों की स्मृतियों में जिंदा है। ऐसे में पूरे जिले की नजर अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच में तेजी आएगी, दोषियों की पहचान होगी और पीड़ित परिवारों को न्याय की दिशा में ठोस प्रगति दिखाई देगी। क्योंकि जब एक साल के भीतर दो मासूम बच्चों की हत्या पूरे समाज को झकझोर देती है, तो जनता का यह सवाल और भी बड़ा हो जाता है—आखिर बेगूसराय में मासूमों को न्याय कब मिलेगा

Begusarai Locals

📍रतनपुर के आयुष का कमाल: आवाज़ के बिना संवाद कराने वाली तकनीक पर किया अनोखा आविष्कार
📍बेगूसराय में ट्रक का टायर फटा, ड्राइवर की दर्दनाक मौत

 

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव टीवी