कृष्णा कुमार UPSC सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज निवासी कृष्णा कुमार ने UPSC में 634वीं रैंक हासिल कर IRS सेवा चुनी। उनकी इस उपलब्धि पर बेगूसराय के भारद्वाज गुरुकुल में उन्हें सम्मानित किया गया।
📍मर्चेंट नेवी की लाखों की नौकरी छोड़ सिविल सेवा का सपना किया पूरा
📍पिता के संघर्ष और बेटों की कामयाबी की कहानी ने भावुक किया भारद्वाज गुरुकुल परिवार
📍कभी स्कूल में सजा देने वाले शिक्षक ने पहनाया पाग
समाचार विचार/बेगूसराय: असफलताएं कितनी भी हों, यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत जारी रहे तो सफलता का रास्ता निकल ही आता है। इस प्रेरक संदेश को साकार किया है भागलपुर जिले के सुल्तानगंज के मूल निवासी कृष्णा कुमार ने। UPSC परीक्षा में 634वीं रैंक हासिल करने और IRS सेवा चुनने की उनकी उपलब्धि पर बेगूसराय के भारद्वाज गुरुकुल में खुशी का माहौल रहा। विद्यालय परिवार ने पाग और अंगवस्त्र देकर उन्हें सम्मानित किया। कभी विद्यालय में अनुशासन के तहत सजा पाने वाले विद्यार्थी को आज उसी संस्थान में सम्मानित होते देख शिक्षक भावुक हो उठे। कृष्णा की सफलता की कहानी केवल एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे लगातार असफलताओं से जूझने, बेहतर करियर के अवसरों के बीच अपने लक्ष्य पर टिके रहने और परिवार के सपनों को पूरा करने का लंबा संघर्ष है।

12 परीक्षाओं में असफलता, फिर भी नहीं मानी हार
भारद्वाज गुरुकुल के निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज के अनुसार, कृष्णा कुमार ने अपने सपनों के करियर तक पहुंचने से पहले 12 परीक्षाओं में असफलता का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। वर्ष 2023 में UPSC प्रीलिम्स में उनका चयन महज एक अंक से चूक गया। वर्ष 2024 में भी वे 1.6 अंक के अंतर से पीछे रह गए। लगातार दो प्रयासों में मामूली अंतर से असफल होने के बावजूद कृष्णा ने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2025 के प्रयास में उन्हें सफलता मिली और मार्च 2026 में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका सपना साकार हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में भी 113वीं रैंक हासिल की थी। SDM पद के विकल्प के बावजूद कृष्णा ने IRS सेवा में जाने का निर्णय लिया।

लाखों की नौकरी छोड़ लक्ष्य के लिए जारी रखी तैयारी
कृष्णा कुमार ने टीएस चाणक्य (T. S. Chanakya) से बीएससी इन नॉटिकल साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जापान की एक कंपनी में मर्चेंट नेवी के थर्ड ऑफिसर के रूप में काम किया। इस पद पर उन्हें लाखों रुपये का वेतन मिलता था। इसके बावजूद उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना बना रहा। माता-पिता की इच्छा भी थी कि उनका बेटा UPSC परीक्षा पास करे। कृष्णा ने अपने करियर के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर लक्ष्य को प्राथमिकता दी और लगातार मेहनत करते हुए सफलता हासिल की।
पिता ने बेटों की शिक्षा और संस्कार को बनाया सबसे बड़ा निवेश
कृष्णा कुमार के पिता श्री विद्या प्रसाद यादव बिहार पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे और पिछले वर्ष सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने तीनों बेटों की शिक्षा और संस्कार पर विशेष ध्यान दिया। शिव प्रकाश भारद्वाज बताते हैं कि वे इस परिवार को जून 2008 से जानते हैं। दोनों भाइयों ने उसी वर्ष छात्रावास में रहकर पढ़ाई शुरू की थी। उनके अनुसार, योगेश्वर कुमार 2011 बैच के टॉपर थे, जबकि कृष्णा कुमार 2013 बैच के टॉपर रहे। कृष्णा के बड़े भाई योगेश्वर कुमार ने वर्ष 2020 में IIM अहमदाबाद से फाइनेंस में MBA की पढ़ाई पूरी की। परिवार का एक अन्य बेटा बिहार के सरकारी विद्यालय में शिक्षक है। परिवार ने वर्षों के संघर्ष के बाद इसी वर्ष अपने जर्जर पुश्तैनी मकान की जगह पक्का मकान बनवाया। यह उपलब्धि बताती है कि शिक्षा, धैर्य और बच्चों के भविष्य के प्रति समर्पण किस तरह एक परिवार की जिंदगी बदल सकता है।

शिव प्रकाश भारद्वाज का संबोधन: विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है कृष्णा की सफलता
कृष्णा कुमार की उपलब्धि पर भारद्वाज गुरुकुल के निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी विद्यार्थी को अपने सपनों के मुकाम तक पहुंचते देखना शिक्षक के जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक होता है। कृष्णा की सफलता पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि विद्यालय से पढ़कर सैकड़ों बच्चे अपने-अपने करियर में आगे बढ़े हैं, लेकिन पहली बार किसी विद्यार्थी ने UPSC में सफलता हासिल की है। ऐसे में कृष्णा की उपलब्धि संस्थान के इतिहास में विशेष स्थान रखती है।शिव प्रकाश भारद्वाज के अनुसार, कृष्णा के पिता बेहद संघर्षशील और धैर्यवान व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने अपने तीनों बेटों की शिक्षा और संस्कार को सबसे बड़ा निवेश माना। परिवार की परिस्थितियों और बच्चों की उपलब्धियों को देखकर यह स्पष्ट होता है कि मजबूत पारिवारिक सहयोग किसी विद्यार्थी की यात्रा में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कृष्णा की सफलता को विद्यार्थियों के लिए प्रेरक उदाहरण बताते हुए कहा कि असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। लगातार प्रयास, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता ही सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार करती है।
जिस हाथ से मिली थी सजा, उसी हाथ ने पहनाया सम्मान का पाग
कृष्णा कुमार जब मिठाई लेकर अपने पुराने विद्यालय पहुंचे तो शिक्षकों ने पाग और अंगवस्त्र देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान शिव प्रकाश भारद्वाज ने गुरु-शिष्य के रिश्ते से जुड़ा एक भावुक प्रसंग साझा किया।उन्होंने बताया कि जिस हाथ से कभी विद्यालय में कृष्णा को सजा मिली थी, उसी हाथ से आज उन्हें सम्मानस्वरूप पाग पहनाया गया। यह दृश्य शिक्षक और विद्यार्थी के बीच वर्षों से बने आत्मीय रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर बन गया।शिक्षक के लिए इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है कि जिस विद्यार्थी को कभी अनुशासन और मार्गदर्शन की जरूरत थी, वही आज अपनी मेहनत से एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर संस्थान का नाम रोशन कर रहा है।

जूनियर विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर साझा किए अनुभव
कृष्णा कुमार ने अपनी सफलता के बाद पुराने विद्यालय के जूनियर विद्यार्थियों से मुलाकात की और उनके साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने केवल सफलता की कहानी नहीं बताई, बल्कि असफलताओं और कठिन दौर का भी जिक्र किया, ताकि विद्यार्थी समझ सकें कि लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। शिव प्रकाश भारद्वाज के मुताबिक, कृष्णा ने विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी की। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से बच्चों को करियर की दिशा तय करने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी समझने और असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने की प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर कृष्णा कुमार को बेगूसराय के लेखक जियाउर रहमान की पुस्तक A River Remembers भी भेंट की गई। जियाउर रहमान सेंट पॉल्स स्कूल में शिव प्रकाश भारद्वाज से तीन वर्ष जूनियर रहे थे।
संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर
कृष्णा कुमार की उपलब्धि यह संदेश देती है कि असफलता किसी लक्ष्य का अंत नहीं होती। मर्चेंट नेवी में बेहतर वेतन वाली नौकरी, लगातार परीक्षाओं में असफलता और कठिन तैयारी के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा। उनकी सफलता से न केवल परिवार और भारद्वाज गुरुकुल गौरवान्वित है, बल्कि उन विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलती है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान निराशा का सामना करते हैं। भारद्वाज गुरुकुल परिवार ने कृष्णा कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।कृष्णा कुमार UPSC सफलता की यह प्रेरक कहानी बताती है कि धैर्य, निरंतर मेहनत और परिवार के सहयोग से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
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