गरीबों की आवाज हमेशा के लिए खामोश: नहीं रहे पूर्व विधायक शिवदानी बाबू

नहीं रहे पूर्व विधायक
📍95 वर्ष की उम्र में पूर्व विधायक ने ली अंतिम सांस
📍वीरपुर के लाल के निधन से शोक में डूबा इलाका
📍सिमरिया गंगा धाम में कल होगा अंतिम संस्कार
समाचार विचार | बेगूसराय
बरौनी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक, पूर्व प्रखंड प्रमुख एवं लंबे समय तक मुखिया रहे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता शिवदानी प्रसाद सिंह उर्फ शिवदानी बाबू का मंगलवार देर रात उनके वीरपुर स्थित पैतृक आवास पर निधन हो गया। उन्होंने करीब 95 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही वीरपुर प्रखंड सहित पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और आम लोग उनके पैतृक आवास पहुंचकर अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। स्थानीय लोगों और पार्टी नेताओं के बीच शिवदानी बाबू की पहचान गरीबों, वंचितों और शोषितों की आवाज के रूप में रही। उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों की आंखें नम हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में समाज के कमजोर तबके के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और अपना पूरा जीवन जनसेवा को समर्पित कर दिया।
छह दशक तक सक्रिय राजनीति में रहे
जनवरी 1932 में एक प्रतिष्ठित एवं संपन्न परिवार में जन्मे शिवदानी प्रसाद सिंह के पिता बाबू सोना प्रसाद सिंह सामाजिक सरोकार और स्वच्छ छवि के लिए क्षेत्र में जाने जाते थे। पिता के सामाजिक संस्कारों का प्रभाव शिवदानी बाबू के सार्वजनिक जीवन पर भी पड़ा। युवा अवस्था में वे वामपंथी आंदोलन से जुड़े और कम्युनिस्ट नेताओं के संपर्क में आने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी और जनसरोकारों के लिए समर्पित कर दिया। पार्टी नेताओं के अनुसार, उन्होंने करीब छह दशकों तक सक्रिय राजनीति और सामाजिक संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिवदानी बाबू करीब 20 वर्षों तक लगातार मुखिया रहे। इसके बाद उन्होंने बरौनी प्रखंड प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1990 से 1995 तक वे बरौनी विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।

नहीं रहे पूर्व विधायक

गरीबों और वंचितों के अधिकार के लिए किया संघर्ष
शिवदानी बाबू ने अपने राजनीतिक जीवन में गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। भूमि विवाद, बटाईदारी, सरकारी पर्चा, मतदान के अधिकार तथा सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने संघर्ष किया। पार्टी नेताओं के अनुसार, कई मौकों पर उन्होंने जनहित के आंदोलनों को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत संसाधनों तक का इस्तेमाल किया। सामंती प्रवृत्तियों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अनियमितताओं के खिलाफ भी वे मुखर रहे।
क्षेत्र में कई सरकारी संस्थानों की स्थापना में भूमिका
पूर्व विधायक के रूप में शिवदानी बाबू ने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में विभिन्न सरकारी संस्थानों की स्थापना और विकास के लिए प्रयास किया। स्थानीय नेताओं के अनुसार, उनके प्रयासों से वीरपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय, थाना, बिजली पावर ग्रिड सहित कई सरकारी संस्थानों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई। भाकपा नेताओं का कहना है कि क्षेत्र के विकास और आम लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
1990 में लाल झंडे से पहुंचे थे विधानसभा
मटिहानी के पूर्व विधायक एवं उनके विधानसभा सहयोगी रहे राजेंद्र राजन ने कहा कि 1990 के विधानसभा चुनाव में जिले से पांच विधायक लाल झंडे के प्रतीक के साथ विधानसभा पहुंचे थे, जिनमें बरौनी से शिवदानी बाबू भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि शिवदानी बाबू का राजनीतिक और सामाजिक योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
निधन की खबर सुनकर उमड़े लोग
शिवदानी बाबू के निधन की सूचना मिलते ही पूर्व विधायक अवधेश राय, राम रतन राय, भाकपा अंचल मंत्री राम प्रवेश सिंह, मनोज कुमार यादव, प्रह्लाद सिंह, दिनेश सिंह, जुलुम सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता उनके पैतृक आवास पहुंचे। सभी ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कुछ माह पूर्व ही उनकी पत्नी 90 वर्षीय शांति सिन्हा का भी निधन हुआ था। शिवदानी बाबू अपने पीछे दो पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
पार्टी कार्यालय में दी गई श्रद्धांजलि
पार्टी के स्थानीय अंचल कार्यालय में अंचल मंत्री राम प्रवेश सिंह की अध्यक्षता में शोकसभा आयोजित की गई। इस दौरान पार्टी का झंडा झुकाया गया और दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया।

नहीं रहे पूर्व विधायक

कल सिमरिया गंगा धाम में होगा अंतिम संस्कार
परिजनों के अनुसार, शिवदानी बाबू का अंतिम संस्कार 1 अक्टूबर को सिमरिया गंगा धाम में किया जाएगा। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। भाकपा अंचल मंत्री राम प्रवेश सिंह ने बताया कि 1 अक्टूबर को दिन में 11 बजे पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय लाया जाएगा। यहां जिले और राज्य के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उन्हें लाल झंडे के साथ अंतिम सलामी और लाल सलाम पेश करेंगे। इसके बाद अंतिम शवयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है। शिवदानी बाबू के निधन से वीरपुर और आसपास के क्षेत्र ने एक ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और राजनीतिक कार्यकर्ता को खो दिया है, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों की आवाज बनने में लगा दिया। उनके जाने से क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।
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