📍लोगों से की गई गांव के धरोहर को बचाने की अपील
📍इंटेक – इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के बेगूसराय चैप्टर का शुभारंभ
📍अपनी विरासत और अपनी संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी है सामूहिक प्रयास

समाचार विचार/बेगूसराय: धरोहर शहरों में नहीं बल्कि गांव में हैं, जिन्हें बचाने की जरूरत है। आज दुनिया के लगभग देशों में अपने धरोहरों के प्रति उदासीनता है। ऐसी स्थिति में इंटक – इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज का यह प्रयास है कि हम अपनी विरासत और अपनी संस्कृति को बचाने के लिए आमजन के साथ प्रयास करें। ये बातें चांद सूरज भवन रिफाइनरी टाउनशिप में इंटेक बेगूसराय चैप्टर का शुभारंभ करते हुए इंटेक के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि आज भारतीय संस्कृति का कोई जोर नहीं है, लेकिन दुख इस बात का है कि ब्रिटिश म्यूजियम में हमारे धरोहरों को संभाल कर रखा गया है और उस म्यूजियम में प्रवेश की व्यवस्था निशुल्क है, जबकि भारत में हर म्यूजियम में टिकट लग रहा है।

गोली और बंदूक से ज्यादा है विरासत की ताकत
उन्होंने कहा कि आम जनों को अपने धरोहर के प्रति लगाव के लिए हमें ब्रिटिश म्यूजियम के कांसेप्ट को लेना चाहिए। साथ श्री ठाकुर ने कहा कि बहुत जल्दी बेगूसराय चैप्टर के द्वारा बच्चों को अपने धरोहरों से जोड़ने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। वहीं दूरदर्शन से अवकाश प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार सुधांशु रंजन ने कहा कि हमें अपनी परंपराओं को लेकर काम करने की जरूरत है। लेकिन परंपराएं ऐसी नहीं हो, जिसमें कोई प्रवाह नहीं हो, जो समाज के लिए सकारात्मक नहीं हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ भगवान प्रसाद सिन्हा ने कहा कि विरासत की ताकत गोली और बंदूक से ज्यादा है। यही हमें दुनिया का इतिहास सिखाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अंध और अति से बचना चाहिए। इसलिए हम हर अच्छी विरासत को बचाएं और अगर परंपराएं प्रवाह प्रवाहित हैं तो उसे बचाया जाए।






