बेगूसराय के प्राइवेट स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: दो छात्र लापता

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📍बेगूसराय के प्राइवेट स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: हॉस्टल से दो नाबालिग छात्र लापता, आखिर कहां थी निगरानी?
📍स्कूल प्रबंधन की कथित लापरवाही ने बढ़ाई अभिभावकों की चिंता
📍दो दिन से लापता छात्रों की तलाश में जुटी पुलिस; CCTV फुटेज खंगालने से लेकर सोशल मीडिया तक चलाया जा रहा अभियान
बेगूसराय
समाचार विचार/बेगूसराय: बेगूसराय के निजी स्कूलों के हॉस्टल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला मुख्यालय स्थित रतनपुर थाना क्षेत्र स्थित न्यू चिल्ड्रेन पैराडाइज स्कूल हॉस्टल से दो नाबालिग छात्रों के लापता होने के मामले ने स्कूल प्रबंधन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। बेगूसराय पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दोनों छात्र 21 सितंबर 2026 से लापता हैं। उनके परिजन की ओर से 23 सितंबर को रत्नपुर थाने में आवेदन दिए जाने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू कर दी है।
हॉस्टल से बच्चे गायब, स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
पुलिस के अनुसार, बेगूसराय स्थित स्कूल प्रबंधन की ओर से परिजनों को फोन के माध्यम से सूचना दी गई थी कि दोनों नाबालिग छात्र एक अन्य नाबालिग साथी के साथ हॉस्टल से बाहर चले गए हैं। इसके बाद परिजनों और स्कूल स्तर से खोजबीन की गई, लेकिन बच्चों का पता नहीं चल सका। यह मामला केवल दो बच्चों के लापता होने तक सीमित नहीं है। हॉस्टल में रहने वाले नाबालिग बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? बच्चे कब और कैसे हॉस्टल से बाहर निकले? उनकी गतिविधियों पर तत्काल निगरानी क्यों नहीं हो सकी? ऐसे कई सवाल अब अभिभावकों के सामने हैं।हालांकि, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे और स्कूल प्रबंधन की वास्तविक जिम्मेदारी का निर्धारण पुलिस जांच के तथ्यों के आधार पर होगा।
दो दिन बाद थाने पहुंचा मामला, अभिभावकों की चिंता बढ़ी
बेगूसराय पुलिस के द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 21 सितंबर को बच्चों के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद खोजबीन की गई और 23 सितंबर को रत्नपुर थाने में आवेदन दिया गया। पुलिस ने दोनों लापता छात्रों की तलाश के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस हॉस्टल के मुख्य द्वार, आसपास के रास्तों, बेगूसराय बस स्टैंड, बेगूसराय रेलवे स्टेशन और प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। बच्चों का विवरण पुलिस पोर्टल पर दर्ज कराया जा रहा है और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर भी सूचना दर्ज कराई जा रही है। इसके अलावा पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी दोनों बच्चों के संबंध में जानकारी प्रसारित की जा रही है।
अभिभावक स्कूल चुनते समय सिर्फ पढ़ाई नहीं, सुरक्षा भी देखें
इस घटना ने उन अभिभावकों के लिए भी चेतावनी की घंटी बजा दी है, जो बच्चों को बेगूसराय के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हॉस्टल की सुविधा वाले निजी स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं। अभिभावकों को स्कूल में दाखिला लेने से पहले केवल फीस, रिजल्ट और पढ़ाई की जानकारी लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश-निकास का रिकॉर्ड, CCTV निगरानी, वार्डन की उपलब्धता, बच्चों की दैनिक उपस्थिति और आपात स्थिति में अभिभावकों को सूचना देने की व्यवस्था के बारे में भी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए। बच्चा हॉस्टल में है तो उसकी सुरक्षा स्कूल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी में शामिल होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अभिभावकों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि महंगी फीस या बड़े नाम वाला स्कूल अपने आप सुरक्षित भी होगा।
सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेही किसकी?
दो नाबालिग छात्रों के लापता होने की घटना के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी कौन-सी कमी रही, जिससे दोनों बच्चे परिसर से बाहर चले गए और समय रहते उनका पता नहीं चल सका? फिलहाल पुलिस दोनों बच्चों की तलाश में जुटी है और CCTV समेत अन्य माध्यमों से सुराग जुटाए जा रहे हैं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के हॉस्टल से बाहर जाने की परिस्थितियां क्या थीं और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं। बच्चों की सुरक्षा कोई समझौते का विषय नहीं है। स्कूल प्रबंधन हो या अभिभावक—हर स्तर पर जवाबदेही और सतर्कता जरूरी है।

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