📍सिमरिया में धूमधाम से मनाई गई राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती
📍‘दिनकर कवि कथा अनंता’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

समाचार विचार/सिमरिया/बेगूसराय: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती बुधवार को उनकी जन्मभूमि सिमरिया में साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण के बीच धूमधाम से मनाई गई। सिमरिया में दिनकर की स्मृतियों को समर्पित समारोह में जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान दिनकर की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ का मंचन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। समारोह में जिलाधिकारी ऋचि पांडेय, पुलिस अधीक्षक मनीष, एसडीएम, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम सहनी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने दिनकर के साहित्य, उनके विचारों और सिमरिया की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘रश्मिरथी’ के मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर
सिमरिया के जयंती समारोह से पहले दिनकर अभिनय कला केंद्र के कलाकारों ने राधे कुमार के निर्देशन में दिनकर की चर्चित कृति ‘रश्मिरथी’ का मंचन किया। कलाकारों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। मंचन के माध्यम से कर्ण के जीवन, संघर्ष और व्यक्तित्व से जुड़े प्रसंगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। वहीं, दिनकर प्लस टू हाई स्कूल के विद्यार्थियों ने संगीत शिक्षक सुनील कुमार के नेतृत्व में स्वागत गान और दिनकर के गीत प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति का रंग भर दिया।
सिमरिया को साहित्यिक तीर्थभूमि बनाने की कोशिश
समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि सिमरिया को साहित्यिक तीर्थभूमि के रूप में विकसित करने का प्रयास लंबे समय से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिनकर की जन्मभूमि केवल बेगूसराय या बिहार की पहचान नहीं है, बल्कि यह हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर है। ऐसे में यहां साहित्य और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने की जरूरत है। तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार ने कहा कि दिनकर के क्षेत्र सिमरिया का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि की रचनाएं आज भी समाज और देश के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने सिक्स लेन पुल का नाम ‘दिनकर सेतु’ रखने तथा शेक्सपियर के गांव की तर्ज पर सिमरिया को विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी रहने की बात कही।
‘दिनकर कवि कथा अनंता’ पुस्तक का लोकार्पण
जयंती समारोह के दौरान साहित्यकार अरविंद कुमार सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘दिनकर कवि कथा अनंता’ का लोकार्पण भी किया गया। पुस्तक के माध्यम से राष्ट्रकवि दिनकर के साहित्यिक व्यक्तित्व और उनकी रचनात्मक यात्रा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक लोकार्पण को समारोह का महत्वपूर्ण साहित्यिक पड़ाव माना गया। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर पर लगातार शोध और लेखन होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके साहित्य और विचारों को बेहतर तरीके से समझ सके।
बेगूसराय की पहचान दिनकर से जुड़ी है : सर्वेश कुमार
एमएलसी सर्वेश कुमार ने कहा कि बेगूसराय की पहचान राष्ट्रकवि दिनकर से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दिनकर की जन्मभूमि सिमरिया के विकास और उसकी साहित्यिक पहचान को मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। पूर्व विधायक ललन कुंवर ने सिमरिया के विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि जन्मभूमि के अनुरूप यहां अभी भी कई स्तरों पर विकास की जरूरत है। उन्होंने सिमरिया को साहित्यिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में और काम किए जाने की आवश्यकता बताई।
चयनित बच्चों को किया गया सम्मानित
समारोह में विभिन्न गतिविधियों में चयनित बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया। बच्चों को सम्मानित करने का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों के प्रति उनकी रुचि को प्रोत्साहित करना रहा। आयोजन में बच्चों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि दिनकर की साहित्यिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता संजय कुमार सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विकास कुमार, समाजसेवी विश्वरंजन राजू, लेखक अरविंद कुमार सिंह और पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने दिनकर के साहित्य और उनके विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए उनकी जन्मभूमि के विकास की आवश्यकता पर चर्चा की।
साहित्य, संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनकर स्मृति विकास समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा ने की। संचालन राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमरदीप सुमन ने किया। समारोह में रेखा कुमारी, विकास कुमार, सीओ हेमंत अंकुर, राजेश कुमार सिंह, रामनाथ सिंह, प्रवीण प्रियदर्शी, कृष्ण नंदन पिंकू, अमर कुमार, प्रदीप कुमार, विनोद बिहारी, ऋत्विक उदयन, विश्वंभर सिंह, अवधेश कुमार पप्पू, शंभू प्रसाद सिंह, कृष्ण मुरारी, प्रियव्रत कुमार, संजीव फिरोज, जितेंद्र झा, ललन कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दिनकर जयंती के अवसर पर सिमरिया में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्मृति समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य, कला और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का अवसर भी बना। ‘रश्मिरथी’ के मंचन से लेकर पुस्तक लोकार्पण और बच्चों के सम्मान तक, पूरे आयोजन में राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक विरासत को केंद्र में रखा गया।
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