बेगूसराय के अयोध्या +2 विद्यालय में इंटर परीक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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📍एक बेंच पर चार-पांच परीक्षार्थी, हाथों में मोबाइल-स्मार्टवॉच!
📍बेगूसराय के अयोध्या +2 विद्यालय में इंटर परीक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल
📍परीक्षा हॉल में शिक्षक की सेल्फी ने खोली व्यवस्था की पोल?
📍नियमों की धज्जियां उड़ने के आरोप, जिला शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

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समाचार विचार/बेगूसराय: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षाओं को कदाचारमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए शासन-प्रशासन की ओर से हर साल बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। परीक्षा केंद्रों पर सघन तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रतिबंध, सीसीटीवी निगरानी और वीक्षकों की जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं की बात कही जाती है। लेकिन बेगूसराय शहर स्थित Gov. Ayodhya Gyan Bharti High School को लेकर सामने आई तस्वीरें और जानकारी इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आरोप है कि इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान यहां एक बेंच पर चार से पांच परीक्षार्थियों के बैठने की स्थिति दिखाई दी। इतना ही नहीं, परीक्षा हॉल के भीतर परीक्षार्थियों के हाथों में कथित तौर पर मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच भी नजर आई। इसी बीच परीक्षा कक्ष में शिक्षक द्वारा सेल्फी लिए जाने की तस्वीर भी सामने आने की बात कही जा रही है। अगर ये तस्वीरें और दावे सही पाए जाते हैं तो सवाल सिर्फ परीक्षा केंद्र की व्यवस्था का नहीं, बल्कि उस पूरी निगरानी प्रणाली का है जिसके भरोसे लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और बिहार बोर्ड की परीक्षा की विश्वसनीयता टिकी हुई है।

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एक बेंच पर चार-पांच परीक्षार्थी, आखिर किस नियम के तहत?
परीक्षा केंद्रों पर सीटिंग व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाते हैं ताकि परीक्षार्थियों को पर्याप्त दूरी मिले और किसी भी तरह की नकल या अनुचित सहायता की संभावना कम हो। बिहार बोर्ड की 2026 इंटर परीक्षा के लिए भी दो स्तर पर तलाशी और परीक्षा कक्ष में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध की जानकारी सार्वजनिक की गई थी।ऐसे में यदि किसी परीक्षा केंद्र में एक ही बेंच पर चार-पांच परीक्षार्थियों को बैठाने की स्थिति सामने आती है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि बेगूसराय के इस विद्यालय का सीट प्लान किसने तैयार किया और उसका सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
क्या केंद्र पर प्रतिनियुक्त अधिकारियों ने परीक्षा शुरू होने से पहले व्यवस्था का निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण हुआ था तो इतनी अधिक संख्या में परीक्षार्थियों को एक बेंच पर बैठाने की अनुमति कैसे मिली? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो फिर जिला स्तर पर परीक्षा केंद्रों की निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की है?

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हाथ में स्मार्टवॉच और मोबाइल तो तलाशी व्यवस्था कहां गई?
सबसे गंभीर सवाल परीक्षा हॉल के भीतर कथित तौर पर मोबाइल और स्मार्टवॉच दिखाई देने को लेकर है। बिहार बोर्ड के निर्देशों में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, इलेक्ट्रॉनिक वॉच और स्मार्टवॉच जैसे उपकरणों को परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित बताया गया था। प्रवेश द्वार पर तलाशी के साथ परीक्षा कक्ष में भी वीक्षक द्वारा जांच की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। ऐसे में यदि तस्वीरों में वास्तव में परीक्षार्थियों के पास मोबाइल अथवा स्मार्टवॉच पाए जाने की पुष्टि होती है तो यह साधारण लापरवाही नहीं मानी जा सकती। यह सवाल सीधे तौर पर तलाशी लेने वाले कर्मियों, वीक्षकों और केंद्र प्रशासन की जिम्मेदारी से जुड़ता है।
📍क्या प्रवेश के समय तलाशी नहीं हुई?
📍क्या परीक्षा कक्ष में दोबारा जांच नहीं हुई?
📍या फिर जांच के बावजूद प्रतिबंधित उपकरण अंदर पहुंच गए?
इन सवालों का जवाब बेगूसराय के विद्यालय प्रबंधन और संबंधित परीक्षा अधिकारियों को देना चाहिए।

परीक्षा हॉल में सेल्फी, क्या परीक्षा ड्यूटी मनोरंजन का मंच है?
बेगूसराय के एक विद्यालय के इस परीक्षा कक्ष में शिक्षक द्वारा सेल्फी लिए जाने की कथित तस्वीर ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है। परीक्षा हॉल वह स्थान है जहां वीक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी परीक्षार्थियों पर निगरानी रखना और परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना होती है। ऐसे में यदि ड्यूटी के दौरान शिक्षक परीक्षा कक्ष में सेल्फी लेते पाए जाते हैं तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि उस समय उनकी निगरानी व्यवस्था किसके जिम्मे थी।परीक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोर्ड ने केंद्रों पर सीसीटीवी, वीडियोग्राफी और सतत निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया था।
फिर सवाल उठता है—जिस परीक्षा में एक-एक मिनट की निगरानी महत्वपूर्ण है, वहां वीक्षक कैमरे के सामने अपनी तस्वीर लेने में व्यस्त हों तो परीक्षार्थियों की निगरानी कौन करेगा?
जिला शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल अब बेगूसराय जिला शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर है। परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था केवल विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं होती। केंद्राधीक्षक, वीक्षक, दंडाधिकारी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होती है। जिला प्रशासन द्वारा जारी परीक्षा संबंधी निर्देशों में कदाचार की स्थिति में केंद्राधीक्षक, वीक्षक और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में यदि अयोध्या +2 विद्यालय से संबंधित तस्वीरें जांच में सही पाई जाती हैं तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निरीक्षण के दौरान ये कथित अनियमितताएं क्यों नहीं पकड़ी गईं।
📍क्या जिला स्तरीय अधिकारी परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं?
📍क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है?
📍क्या केंद्रों पर सीटिंग व्यवस्था और तलाशी की वास्तविक स्थिति की जांच की जा रही है?
इन सवालों का जवाब अभिभावकों और परीक्षार्थियों को मिलना चाहिए।
बच्चों की मेहनत के साथ खिलवाड़ का सवाल
इंटरमीडिएट परीक्षा किसी विद्यार्थी के लिए महज एक परीक्षा नहीं होती। उसके आगे की पढ़ाई, कॉलेज में प्रवेश और भविष्य की कई संभावनाएं इसी परिणाम से जुड़ी होती हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्र पर नियमों में कथित ढिलाई की एक छोटी-सी घटना भी पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी परीक्षार्थी के पास प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है, इसलिए नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीर होनी चाहिए।

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अब जांच और जवाबदेही जरूरी
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा विभाग को केवल तस्वीरों को देखकर प्रतिक्रिया देने के बजाय निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। परीक्षा केंद्र की सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश के समय की तलाशी, सीटिंग प्लान, प्रतिनियुक्त वीक्षकों की ड्यूटी और परीक्षा कक्ष की रिकॉर्डिंग की जांच से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। विद्यालय प्रबंधन को भी यह बताना चाहिए कि यदि कथित तौर पर एक बेंच पर चार-पांच परीक्षार्थी बैठे थे अथवा प्रतिबंधित उपकरण परीक्षा कक्ष तक पहुंचे तो इसके पीछे क्या कारण था।
सवाल सीधा है—जब परीक्षा व्यवस्था के लिए इतने सख्त नियम बनाए गए हैं, तो क्या उनका पालन केवल कागजों पर होना है या परीक्षा केंद्रों के भीतर भी?
फिलहाल सामने आई तस्वीरों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि जांच में अनियमितताएं सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा केंद्र पर व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति न हो।
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